काव्यपथ Hm1

उलफ़त

Tushar Pandey

ये अजब गज़ब के वादे कि
ले आऊं तोड़ सितारे मैं?
पुर-ज़ोर चमकना चेहरा उसका
जैसे ले ही आया सारे मैं

पहलू में बैठे मेरे यूं
बहकी बातें कर जाती वो
फ़िर बात-बात के पेंच खोल
जोरों हंसती, खो जाती वो

उस शोख कली के आते ही
एक ख़ुश-रंगी गुलजार खिले
बरसों उकताए बच्चे को
बचपन का बिछड़ा यार मिले

सरे राह गुजरते, मंदिर में
हाथों का बरबस जुड़ जाना
खुद बेखुद होकर, दूजे की
खुशियों की अर्जी दे आना

मिसरी सी मीठी लगती
थोड़ी खारी लगती है
उसके साथ ये दुनिया अब
कुछ और भी प्यारी लगती है

kavyapath.com/p/Hm1