काव्यपथ Wh5

सब कुछ अपना

Tushar Pandey

लक्ष्य निकट
पर मार्ग कठिन हो
क्षितिज दिखे पर सूर्य मलिन हो

मन की शक्ति जब भी तेरी
थोड़ी धुंधली होने आए
उम्मीदों की ज्वाला को
संशय का अंधियारा खाए

थोड़ी आग बचा रखना तुम
धीमे सही मगर तपना तुम
जो खोया उसका क्या रोना
व्यर्थ ही है सपने ढोना

कोई सपना ना होना
हर सपना अपना होना है
कुछ भी अपना ना होना
शायद सब कुछ अपना होना है

भला हुआ जो सपने टूटे
घर बिछड़ा और अपने छूटे
रजवासों के बीच भला कब
मानुष 'राम' बना करता है।
जो फिरता, वहीं तिरा करता है।

kavyapath.com/p/Wh5