46

जागि जागि चौखट निहारूँ

✤ ❊ ✤ ❊ ✤ ❊ ✤ ❊ ✤ ❊ ✤ ❊ ✤ जागि जागि चौखट निहारूँ पिया जी, अँखियाँ मोरी मतवारी रहत है। उठि उठि भागूं मैं जमुना किनारे, दरसन आस तिहारी रहत है।…

45

पुरुषत्व

अश्रांत कौंधती अग्नि हृदय, वाणी गरजे सर्वत्र, निर्भय। थाह क्षुधा का ज्ञात नहीं, ये कैसी माया? ज्ञात नहीं। जिह्वा से ज्वाला बहती है, नथुनों म…

44

ख्वाबदारी

बड़ी ही तंग रातें हैं, इन्हीं दिनों की बात है। जब बेबसी ही तौर है, और मुफलिसी का दौर है। कहतें है एक वक़्त है, अंधेरी बारिशों की भी, खिल उठे…

43

मौन की देहरी पर

रात के हल्के धुंधलके में सैकड़ों बिसरी हुई दास्तानों ने एक साथ दस्तक दे दी है। नीले आसमान की रगों में कालिमा पसरती हुई दिख रही है। आसमान से …

42

रेलगाड़ी

चाँदनी रात है, दूधिया रोशनी से नहाए खेतों के बीचोंबीच एक रेलगाड़ी सरपट भागती जा रही है। गांवों, शहरों और कस्बों की टिमटिमाती बत्तियों से सजे…

41

अनायास

1. संशयों का एक मायावी दानव तैयार बैठा था लीलने को सारी उम्मीदें, सारे सपने कर देने को निष्प्राण तैयार बैठा था मन में ढूंढने को एक कोना जो म…

40

पुराना सुकून वापस पाएं

सुबह से ही तेज गिर रही बारिश थोड़ी रुक गई है। धान के कोमल नन्हें पौधों की नाज़ुक जड़ें थामे, मेंढक-मेंढकियां, बादलों की ओट से छुपके, ज़रा चु…