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कविता
18 रचनाएँ
पुरुषत्व
अश्रांत कौंधती अग्नि हृदय, वाणी गरजे सर्वत्र, निर्भय। थाह क्षुधा का ज्ञात नहीं, ये कैसी माया? ज्ञात नहीं। जिह्वा से ज्वाला बहती है, नथुनों म…
रेलगाड़ी
चाँदनी रात है, दूधिया रोशनी से नहाए खेतों के बीचोंबीच एक रेलगाड़ी सरपट भागती जा रही है। गांवों, शहरों और कस्बों की टिमटिमाती बत्तियों से सजे…
प्रेम गीत गाए
भाग की पटखनी से पैर डगमगाए फ़िर भी मुस्कुराए, हाय! प्रेम गीत गाए जिद्दी मनवा धूल झाड़ फिर उठ जाए। मोह माया जाने बूझे फ़िर भी इसे इश्क़ सूझे …
चाँद
वह कहती— चाँद हो तुम। सैंकड़ों मौन रस्ते, गीत गाते, मेरे खिलखिलाते चाँद। तन्हा तपती रातों में, मेरे संग जगते, दिल लुभाते चाँद। तुम्हें मैं घ…
प्रेम सुधा साँचा रस है
स्वार्थ, द्वेष की फांस लिए, सब का, अपना ढेरा है। चाहे बंधु, सखा, कुल छूटे, कहते, ये मेरा, वो तेरा है! फिर शुष्क पड़े कुछ आंखों के, आतप जलते …
ईप्सा
दुनियावी ढोल मंजीरों के बीच, ओझल होतीं मेरी रवहीन सांसे। उचकता, उछलता और नाचता मैं — बेसुरा, एक अदना आदम। गीत बुनने की ईप्सा में, थकता-बुझता…
प्यार मेरे
फेरो नज़र मेरी तरफ़ ऐ यार मेरे इस बेरुखी की अब नहीं दरकार तेरे इक चांद जो अटका हुआ मेरे फलक पर छूकर उसे, ढलने दो अब सरकार मेरे देखो जरा, कुछ…
उलफ़त
ये अजब गज़ब के वादे कि ले आऊं तोड़ सितारे मैं? पुर-ज़ोर चमकना चेहरा उसका जैसे ले ही आया सारे मैं पहलू में बैठे मेरे यूं बहकी बातें कर जाती व…
स्पर्श
सोचो वे बड़े सुभागे होंगे! कितनी रातों को जागे होंगे! परस्पर्श नहीं जिनके जीवन, क्या गीत प्रेम के गाते होंगे? कुहक कुहक कोमल केकी, जब राग मी…
एक कतरा सुख
कुछ बिखरा होगा बरसों पहले कोई चोट आई होगी दिल पर एक गहरा संताप या फिर बहुत थोड़ी मामूली सी बेचैनी, न जाने क्यों पसरी रहती है इनकी कालिमा जैस…
इसक
मैं इधर देखूं या उधर देखूं वो ही नज़र आए जिधर देखूं इसक की रंग का गहरा असर है न कोई ग़म, न कोई फ़िकर है ज़माना सुर्ख आंखे लाल लेकर कंटीले कायद…
सांख्य योग
जीत हार का दंश, नहीं विचलित करता जिस नर को, तन, मन, धन सर्वस्व होम कर, फिरता निर्भीक समर को। मिथ्याओं के बीच बात जो सत्य शील की करता है, षड्…
सब कुछ अपना
लक्ष्य निकट पर मार्ग कठिन हो क्षितिज दिखे पर सूर्य मलिन हो मन की शक्ति जब भी तेरी थोड़ी धुंधली होने आए उम्मीदों की ज्वाला को संशय का अंधियार…
व्हाइट नाइट्स
"सपनो में डूबा मैं हकीकी दुनिया से अनजान मुझे समेटने दो वो रुका हुआ चांद "ये बरबस गिरते दरियादिल बेचारे आंसू मत रोको इन्हे इनकी चोट से कोई घ…
खुशगवार शाम
उठती बैठती मूक सांसे। तेज गिरती बारिश से धुलकर, और चटख होती, इक धुंधली-सी याद! होठों के नीचे एक नन्हा सा तिल। उसकी डूबती नजरों में गोते खाता…
अलेक्जेंड्रिया
अलस-सुब्ह गिरती-रुकती दुविधापूर्ण बारिश ढीठ दिहाड़ी मजदूर गड्ढों से बचते भागते लोग उधर बेपरवाह थोड़ी मदमत्त सबको हिकारत से ताकती स्कूटर की म…
रणभेरी
मन बल हो शिथिल लगे मार्ग जटिल कभी नीरस कोई लम्हा हो मन चीख उठे 'तुम तन्हा हो!' ये चीख कभी रुकने न दो पलकें अपनी झुकने न दो हो अंधियारा कितना…
श्री रामदरबार दृश्यावलोकन
दृश्य बड़ा ही पावन है ऋतुओं में जैसे सावन है रामलला की झांकी ये मनहर, सुरम्य, मनभावन है अपने हिय को पल भर में चीर श्री धाम दिखाते महावीर। दर…