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कहानी

6 रचनाएँ

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चिंचपोकळी'' के समोसे

ऑफिस में किसी ने नाश्ते का डब्बा मंगवाया था। देर से नाश्ता मिलने पर एकसाथ ढोकला, समोसा पर धधककर टूटते हुए ये एहसास हुआ कि शायद भूख का स्वाद …

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डाह

सुदर्शन के खलिहान में ट्रैक्टर से अभी अभी उतारी हुई गेहूं की फसल से एक पहाड़नुमा आकृति बन गई थी। सर के ऊपर तेज खड़े चैत के सूरज के तले रखे ग…

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पूस मास बीति गयउ बाग बन जागि उठें

**पूस मास बीति गयउ बाग बन जागि उठें, काकलीख बांचहिं बैठि बात आपन चीति की। मीठि बयरिया में सुलगै अँकोरि मोरि, निष्ठुर बसंत आयउ कहुँ टोह नहिं …

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मयरिया

कातिक महिनवा मे सूरूज ठंडइलें लागल भोरे बहे शीतली बयरिया निमिया पर बईठल, चिरईया भी गावे एही मासे अइहें रे हमरो मयरिया काल्हे दुपहरिया में का…

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कई चाँद हैं सर-ए-आसमां

ट्रेन किसी छोटे से स्टेशन से गुजर रही थी। बनारस आने में अभी दो घंटे बाक़ी थे। अमर की नजर खिड़की से बाहर पेड़ों कि झुरमुट में छिपते निकलते सा…

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कूट-नीति

नेताजी जबसे दिल्‍ली से घर आए कुछ निराश से थे, उन्‍हें मायूस देख अगल बगल के दरबारियों में भी उदासी छा गई। पंद्रह वर्षों से सांसद रहते हुए भले…