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संस्मरण
3 रचनाएँ
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श्रृंगार
राजधानी के गगनचुंबी स्वर्ण अट्टालिकाओं के बीच सूरज पूरी शक्ति के साथ चमक रहा था। पर उसकी रोशनी रनिवास तक पहुंचते पहुंचते धूमिल हो उठती थी। र…
गहरी नींद
किसी तेज धमाके ने मुझे जगाया। मुझे तेज ठंड लग रही थी। आंखे कुछ देर तक बोझिल ही थीं। कमरे में बहुत थोड़ी रोशनी बची थी। शायद सुबह हो गई थी। मै…
मनीऑर्डर
दस घंटे से ज्यादा का रेल का सफ़र थका देने वाला था।आंखें खुली तो पाया कि ट्रेन में शायद मैं अकेला ही था, सब उतर चुके थे। मुझे समझते देर नहीं …