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गद्य

9 रचनाएँ

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पुराना सुकून वापस पाएं

सुबह से ही तेज गिर रही बारिश थोड़ी रुक गई है। धान के कोमल नन्हें पौधों की नाज़ुक जड़ें थामे, मेंढक-मेंढकियां, बादलों की ओट से छुपके, ज़रा चु…

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खूबसूरत मोड़

दोपहर बेवक्त नींद टूटती है और मैं बिस्तर पर औंधे लेटे हुए, बगल की दीवार पर नजरें धंसाए, खुद को खोया हुआ पाता हूं। ये किसका घर है, मैं यहां क…

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अधूरा लिखूंगा

लिखने चलूं गर तुम्हारा ये चेहरा पहले कहूंगा कि सुंदर है चेहरा फ़िर थोड़ी और कोशिश करूं तो लिखूंगा कि कैसे तुम्हारी एक नज़र मुझे छू जाती है—ऐ…

26

पाप

साल का ये वह दौर था जब सर्दियां एक हठीले माशूक़ की तरह छोड़ जाने को तैयार ही नहीं हो रही थी। ठंड के कपड़े सूरज के निकलते ही कांटो की तरह बदन…

25

अजीब दास्तां है ये

मौत का भी इलाज हो शायदज़िंदगी का कोई इलाज नहीं- फ़िराक़ गोरखपुरी एक समय जब मेरे सारे मित्र और परिवार के लोग, गुलाबी ठंड का बहुआयामी तरीकों स…

22

वापसी

त्यौहारों के ख़त्म होते ही ऐसा लगता है मानो टीवी पर कार्टून देख रहे बच्चे को जबरदस्ती पढ़ने के लिए बिठा दिया गया हो। चंद घंटों पहले की चहल-प…

08

पिकनिक

गली में हींग या कोई जड़ी-बूटी बेच रहा एक इंसानों जैसा ही कोई प्राणी जोर-जोर से कुछ चिल्ला रहा था। धंसे गाल और काकरूपी टांगे होते हुए भी उसमे…

07

कलिकाल

पश्चिम में सूरज अस्ताचल पर्वत के सतहों में पिघलने लगा था। अंधेरे और बची खुची लालिमा के बीच संघर्ष से भयभीत खगों ने अब कूहना बंद कर दिया था। …

04

आत्‍मावलोकन

दिन के हिस्से जो रवि है देवताओं की छवि है काश ख़ुद का सूर्य होता रजनी को उपहार देता.. "हटा के बेड़ियां भीतर के मन की करूं स्वीकार मैं आखेट व…